अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026 के नतीजों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक चुनौतियां बढ़ा दी हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और सीनेट (Senate), दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इस जीत के बाद अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस में सत्ता का संतुलन बदल गया है। अब ट्रंप को अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए विपक्षी डेमोक्रेट्स के साथ बातचीत और समझौता करना पड़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, डेमोक्रेट्स ने सीनेट में कम से कम 54-44 का बहुमत हासिल किया है और प्रतिनिधि सभा में भी उनकी बढ़त काफी मजबूत है। यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में पहली बार होगा, जब उन्हें दोनों सदनों में विपक्ष के नियंत्रण वाली कांग्रेस का सामना करना पड़ेगा।
दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण, ट्रंप के सामने नई चुनौती ?
अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों की भूमिका राष्ट्रपति की नीतियों और फैसलों पर नियंत्रण रखने में महत्वपूर्ण होती है प्रतिनिधि सभा में बहुमत मिलने से डेमोक्रेट्स को विभिन्न संसदीय समितियों का नियंत्रण, सरकारी कामकाज की जांच और प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब मांगने की अधिक शक्ति मिलेगी। वे ट्रंप प्रशासन की नीतियों, खर्चों और फैसलों पर सुनवाई करा सकते हैं। दूसरी ओर, सीनेट में बहुमत मिलने से डेमोक्रेट्स को राष्ट्रपति की कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों पर प्रभाव डालने का अवसर मिलेगा। इनमें कैबिनेट अधिकारियों, राजदूतों और संघीय न्यायाधीशों की नियुक्तियां शामिल हैं। हालांकि, सीनेट में कई सामान्य विधेयकों को आगे बढ़ाने के लिए 60 वोटों की जरूरत पड़ सकती है, क्योंकि वहां फिलिबस्टर नाम की संसदीय प्रक्रिया लागू होती है।
ट्रंप की वीटो पावर बनेगी सबसे बड़ा हथियार ?
अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति को कांग्रेस से पारित विधेयकों पर वीटो लगाने का अधिकार देता है। इसका मतलब है कि अगर प्रतिनिधि सभा और सीनेट किसी ऐसे कानून को मंजूरी देते हैं, जो ट्रंप की नीतियों के खिलाफ है, तो राष्ट्रपति उस विधेयक को हस्ताक्षर करने से रोक सकते हैं।
राष्ट्रपति के वीटो के बाद विधेयक दोबारा कांग्रेस के पास जाता है। लेकिन कांग्रेस के पास राष्ट्रपति के वीटो को पलटने का विकल्प भी मौजूद है। इसके लिए प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। यानी सिर्फ साधारण बहुमत हासिल कर लेने से डेमोक्रेट्स ट्रंप के वीटो को खत्म नहीं कर पाएंगे। यही वजह है कि वीटो पावर ट्रंप के लिए एक मजबूत संवैधानिक सुरक्षा कवच साबित हो सकती है।
क्या ट्रंप के फैसलों पर लग जाएगा ब्रेक?
डेमोक्रेट्स के नियंत्रण वाली कांग्रेस ट्रंप की कई नीतियों को चुनौती दे सकती है। बजट, सरकारी खर्च, टैक्स, स्वास्थ्य सेवाओं और आव्रजन जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच टकराव बढ़ने की आशंका है।
कांग्रेस सरकारी फंडिंग को लेकर भी राष्ट्रपति पर दबाव बना सकती है। यदि बजट पर सहमति नहीं बनती है, तो सरकारी कामकाज प्रभावित होने और शटडाउन जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा रहता है। इसके अलावा, प्रतिनिधि सभा के पास महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार है। लेकिन राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए सीनेट में दो-तिहाई सदस्यों का दोषी ठहराने के पक्ष में मतदान जरूरी होता है। इसलिए केवल प्रतिनिधि सभा में बहुमत होने से राष्ट्रपति को हटाया नहीं जा सकता।
राष्ट्रपति के पास अभी भी रहेंगी कई शक्तियां ?
कांग्रेस में बहुमत खोने के बावजूद ट्रंप की राष्ट्रपति के रूप में संवैधानिक शक्तियां बनी रहेंगी। वे कार्यकारी आदेश जारी कर सकते हैं, विदेश नीति से जुड़े फैसले ले सकते हैं और सशस्त्र सेनाओं के कमांडर-इन-चीफ के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा सकते हैं।
हालांकि, ऐसे कई फैसलों पर कांग्रेस कानूनी, वित्तीय और संसदीय स्तर पर नियंत्रण रखने की कोशिश कर सकती है। एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि नए निर्वाचित सांसदों का कार्यकाल 3 जनवरी 2027 से शुरू होगा। तब तक मौजूदा कांग्रेस का कार्यकाल जारी रहेगा।
आगे क्या होगा ?
डेमोक्रेट्स की जीत से वाशिंगटन में राजनीतिक टकराव बढ़ सकता है। ट्रंप को अब कई विधायी फैसलों के लिए विपक्ष का सहयोग लेना पड़ सकता है। वहीं, डेमोक्रेट्स के पास प्रशासन की निगरानी और नीतियों को चुनौती देने के अधिक अवसर होंगे। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में दोनों सदनों का नियंत्रण खोना ट्रंप के लिए बड़ा राजनीतिक झटका है, लेकिन उनकी राष्ट्रपति पद की शक्तियां समाप्त नहीं हुई हैं। वीटो पावर, कार्यकारी अधिकार और संवैधानिक शक्तियां उनके पास बनी रहेंगी। आने वाले दो साल अमेरिकी राजनीति में राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच शक्ति-संतुलन की बड़ी परीक्षा साबित हो सकते हैं।






