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यूपी रोडवेज की बदलेगी तस्वीर, AI तकनीक से संचालित होंगी 14,300 बसें; ₹30 करोड़ के डिजिटल सिस्टम से सुधरेगा संचालन ?

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उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए योगी सरकार और उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) नई तकनीक का सहारा लेने जा रहे हैं। अब प्रदेश की रोडवेज बसों के संचालन, रूट निर्धारण और समय प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के 120 डिपो से संचालित लगभग 14,300 बसों को एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना है। इसके लिए परिवहन निगम ने AI आधारित डिपो प्रबंधन और बस संचालन नियोजन प्रणाली के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।

120 डिपो और 14,300 बसों का होगा डिजिटल प्रबंधन ?

उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के अंतर्गत वर्तमान में लगभग 120 डिपो संचालित हैं। इनसे करीब 14,300 बसें चलती हैं और प्रतिदिन 17 लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं। नई AI प्रणाली लागू होने के बाद सभी डिपो की बसों का टाइम टेबल एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। इससे अलग-अलग डिपो के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकेगा। मुख्यालय और क्षेत्रीय अधिकारी भी एक ही डैशबोर्ड के माध्यम से बसों के संचालन तथा डिपो के प्रदर्शन की निगरानी कर सकेंगे।

यात्रियों की संख्या के हिसाब से तय होंगे बसों के रूट ?

नई तकनीक का सबसे बड़ा फायदा बसों की उपलब्धता और रूट निर्धारण में देखने को मिल सकता है। AI सिस्टम अलग-अलग मार्गों पर यात्रियों की संख्या, यात्रा की मांग, सफर में लगने वाला समय और उपलब्ध बसों का विश्लेषण करेगा।

इसके आधार पर तय किया जा सकेगा कि किस रूट पर कितनी बसों की आवश्यकता है और बसों के बीच कितना अंतराल होना चाहिए। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी व्यस्त मार्ग पर हर 15 मिनट में बस की जरूरत है, तो अलग-अलग डिपो की बसों का समय इस तरह निर्धारित किया जा सकेगा कि यात्रियों को नियमित अंतराल पर परिवहन सुविधा मिले। इससे बसों के लिए लंबा इंतजार करने की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।

ड्राइवर-कंडक्टर की ड्यूटी और मरम्मत का भी डिजिटल रिकॉर्ड ?

यह परियोजना केवल बसों के रूट और टाइम टेबल तक सीमित नहीं रहेगी। इसके माध्यम से चालक और परिचालक की ड्यूटी, बसों की उपलब्धता, सर्विसिंग, मरम्मत और रखरखाव से जुड़ी जानकारी भी डिजिटल रूप में दर्ज की जाएगी।

इससे अधिकारियों को पता चल सकेगा कि कौन-सी बस संचालन के लिए उपलब्ध है, किस बस को मरम्मत की जरूरत है और किस डिपो में संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। डिजिटल निगरानी से कर्मचारियों की ड्यूटी और बसों के संचालन में पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

ईंधन की बचत और निगम की कमाई बढ़ाने पर जोर ?

AI आधारित व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य परिवहन निगम के खर्च को नियंत्रित करना भी है। जिन मार्गों पर यात्रियों की मांग कम है, वहां बसों की संख्या जरूरत के अनुसार तय की जा सकेगी। वहीं अधिक यात्रियों वाले मार्गों पर बसों की उपलब्धता बढ़ाने की योजना बनाई जा सकेगी।

इससे खाली बसों के अनावश्यक संचालन, ईंधन की खपत और रखरखाव से जुड़े खर्च को कम करने में सहायता मिल सकती है। परिवहन निगम को उम्मीद है कि बेहतर समय प्रबंधन और नियमित बस सेवाओं से यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा। इससे रोडवेज बसों में सफर करने वाले लोगों की संख्या और निगम के राजस्व में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

केंद्र सरकार की इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम योजना के तहत पहल ?

यह परियोजना केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (ITS) योजना के तहत आगे बढ़ाई जा रही है। परियोजना के लिए तकनीकी सेवा प्रदाता का चयन निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश रोडवेज में AI आधारित डिजिटल सिस्टम लागू होने से बस संचालन, रूट निर्धारण, कर्मचारियों की ड्यूटी और रखरखाव की व्यवस्था अधिक डेटा आधारित हो सकती है। हालांकि, यात्रियों को इसका वास्तविक लाभ परियोजना लागू होने और सिस्टम के प्रभावी संचालन के बाद ही दिखाई देगा।

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