8 जून को INDIA गठबंधन की बैठक में 20 से भी ज़्यादा नेताओं के भाषणों और बातों को सुनने के बाद आखिर में राहुल गांधी ने उन्हें संबोधित किया। जो बेहद चुनौती भरा था उन्होंने कहा जब भारत की सोच, देश की आत्मा पर संकट हो, जब संस्थाओं पर कब्ज़ा हो, जब जनता की आवाज़ दबाई जाए, तब सिर्फ़ एकता के साथ प्रतिरोध काम आता है। मैं फिर से कह रहा हूँ – 2024 का चुनाव हम हारे नहीं थे और 2029 का चुनाव हम जीत चुके हैं। हम एकजुट रहेंगे, जन–जन को संगठित करेंगे और प्रतिरोध की ताकत से BJP और उसके भारत के संस्थानों पर कब्ज़े को हराएंगे।
INDIA गठबंधन की बैठक में राहुल गांधी का हिंदी में भाषण पढ़िए और सुनिए ये इस सदी के सबसे महानतम भाषणों में से एक है सुनिए और सहज कर रखिए आने वाली पीढ़ियों के लिए यह एक ऐतिहासिक दस्तावेज है
मैं आप सभी का यहां स्वागत करता हूं। आने के लिए धन्यवाद।
कई साल पहले मेरी एक अच्छे मित्र से बहस हुई थी। मैंने उनसे कहा कि जो आप कर रहे हैं, वह अनुचित है। उन्होंने जवाब दिया, “दुनिया निष्पक्ष नहीं है, इसकी आदत डाल लो।”
आज कांग्रेस पार्टी के बारे में जो बातें कही गईं, उनका जवाब देना मेरा काम नहीं है। मेरा काम शिव परंपरा की तरह सब कुछ सह लेना है। जैसे भगवान शिव ने विष पिया था, वैसे ही हमारे बारे में जो भी आलोचना होगी, हम उसे मुस्कुराकर स्वीकार करेंगे।
हम आपको साथ लेकर चलने की कोशिश करेंगे, क्योंकि हमारी भूमिका आप सबसे अलग है। हमारा काम प्रेम और स्नेह के साथ सभी को एकजुट करना है।
मैं 2004 से कांग्रेस सांसद हूं। मैंने अपना पहला चुनाव उसी वर्ष लड़ा था। कांग्रेस पार्टी भारत की अन्य पार्टियों से मूल रूप से अलग है।
क्यों?
क्योंकि कांग्रेस आधुनिक भारत बनने से पहले एक प्रतिरोध आंदोलन (Resistance Movement) के रूप में पैदा हुई थी। यह सत्ता के संरक्षण से नहीं बनी, बल्कि भारत के विचार की रक्षा करने के लिए बनी थी।
हम आरएसएस की विचारधारा के मूलतः विरोधी हैं। कांग्रेस पार्टी आरएसएस के सामने झुकेगी नहीं। हम समझौता नहीं करेंगे। हमारे लाखों कार्यकर्ता अपना सिर कटवा देंगे, लेकिन आरएसएस के सामने नहीं झुकेंगे।
मुझे लगता है कि इस गठबंधन में एक भ्रम है। एसपी, टीएमसी, आरजेडी और अन्य दल मानते हैं कि अब तक जिन राजनीतिक साधनों का उपयोग करते आए हैं, वे आगे भी काम करेंगे।
लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं।
भाजपा राज्य की संस्थाओं पर नियंत्रण रखती है। कानूनी व्यवस्था, नौकरशाही, खुफिया एजेंसियां और यहां तक कि चुनाव आयोग भी उसके प्रभाव में हैं।
मैंने कई राज्यों में यह होते देखा है—गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और महाराष्ट्र में।
कांग्रेस पार्टी प्रतिरोध की पार्टी है। उसे संस्थाओं की निष्पक्षता की आवश्यकता नहीं है। जितना अधिक संस्थाओं का दुरुपयोग होगा, उतनी ही मजबूती से कांग्रेस संविधान की रक्षा के लिए लड़ेगी।
हमारे आदर्श क्या हैं?
सत्य, अहिंसा और करुणा।
मेरा उद्देश्य अपने सहयोगियों से लड़ना नहीं है। आप हमारे मित्र हैं, हमारे साथी हैं।
2024 का चुनाव हम नहीं हारे। और मैं आपको बताना चाहता हूं कि भविष्य में जो थोड़े बहुत लोकतांत्रिक साधन अभी काम कर रहे हैं, वे भी धीरे-धीरे खत्म किए जाएंगे, क्योंकि भाजपा और आरएसएस अपनी पकड़ लगातार मजबूत कर रहे हैं।
ऐसे समय में क्या काम करता है?
प्रतिरोध काम करता है।
मैंने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान 4000 किलोमीटर चलकर इसे अपनी आंखों से देखा है।
प्रतिरोध किसी संगठन का नाम नहीं है, यह एक सोच है।
हमें एक-दूसरे से लड़ना बंद करना होगा। मीडिया को हमें बांटने का मौका नहीं देना होगा।
अगला चुनाव जीतना सबसे बड़ी चुनौती नहीं है। लोगों में इतना गुस्सा है कि अगला चुनाव लगभग तय है। असली चुनौती लोकतांत्रिक संस्थाओं पर कब्जे की है।
इसलिए हमें प्रतिरोध के मोड में जाना होगा।
प्रतिरोध सीआरएसपीसी में है। प्रतिरोध मनरेगा में है। प्रतिरोध ग्रेट निकोबार के मुद्दे में है। प्रतिरोध भारत जोड़ो यात्रा में है।
हर सुबह उठकर खुद से पूछिए—मैं प्रतिरोध कैसे कर सकता हूं?
और फिर प्रतिरोध कीजिए।
मेरे लिए यह सिर्फ राजनीति नहीं है। यह एक नैतिक और आध्यात्मिक कर्तव्य है। मैं इस गठबंधन को एकजुट रखने के लिए हर अपमान सहने को तैयार हूं।
हमें यह भ्रम छोड़ना होगा कि चुनाव केवल आंशिक रूप से प्रभावित होते हैं।
मैं स्पष्ट रूप से कहता हूं—
चुनाव चोरी किए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया निष्पक्ष नहीं है। मीडिया, सोशल मीडिया, कानूनी व्यवस्था, नौकरशाही और खुफिया एजेंसियों का पूरा ढांचा इस सरकार को सत्ता में बनाए रखने के लिए काम कर रहा है।
लेकिन यह सरकार टिक नहीं पाएगी, क्योंकि इसने लोकतंत्र और भारत के युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाया है।
यह भी मत सोचिए कि विपक्ष एकजुट नहीं है। भारत के विचार की रक्षा की बात आएगी, तो इस कमरे में मौजूद हर व्यक्ति साथ खड़ा होगा।
हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भारत के विचार की रक्षा के लिए हम साथ हैं।
अंत में मैं कहना चाहता हूं कि हमारी बैठकों में अक्सर निराशा दिखाई देती है। लोग सोचते हैं कि भाजपा को कैसे हराएंगे?
मेरा जवाब है—
अगर हम एकजुट रहे और प्रतिरोध करते रहे, तो भाजपा को हराना आसान है।
पिछले चुनाव में इस कमरे में लगभग किसी को विश्वास नहीं था कि भाजपा को चुनौती दी जा सकती है। अब हम सबको