श्याम लाल शर्मा/नई दिल्ली/छाया -आशीष कर/आर.बी.यादव
बस अब कुछ ही घंटे शेष रह गए हैं। दिल्ली अब दूर नहीं, अगला स्टेशन दिल्ली, अगला बस स्टैंड दिल्ली ! तेलंगाना, बेंगलुरु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश ऐसा कोई प्रदेश नहीं बचा जहां से देश का युवा देश के संविधान को बचाने ना आ रहा हो! लोकतंत्र को बचाने ना आ रहा हो! मोदी – शाह की वोट चोरी रोकने ना आ रहा हो! मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जेल भेजने का विचार नहीं आ रहा हो…! जिसे जो साधन मिल रहा है 1 नवंबर को रामलीला मैदान में पहुंचने को उतावला है।आज एक तरफ़ जहाँ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के सरकारी आवास, 10 राजाजी मार्ग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया गठबंधन की ओर से आयोजित प्रतीकात्मक संसद में महाभियोग चलाया गया इस प्रतीकात्मक महाभियोग की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। कार्यक्रम में संसद और अदालत की कार्यवाही की तर्ज पर एक प्रतीकात्मक सुनवाई आयोजित की गई है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया।
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पेश करते हुए कहा- सत्तारूढ़ पार्टी के विरोधियों को निशाना बनाने के लिए “ईसीआई (चुनाव आयोग) ने एसआईआर की घोषणा रातोंरात की। इसे पूरे देश में लागू किया गया, जिसका मकसद भाजपा विरोधियों के वोटों को हटाना था।” उन्होंने मोदी सरकार पर अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए बाहरी लोगों और घुसपैठियों की चिंताओं का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “वे आरोप लगाते हैं कि हम घुसपैठियों को शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा नहीं है; हम तो बस असली, वैध मतदाताओं को बनाए रखने की वकालत कर रहे हैं। हम यह उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कर रहे हैं।”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को भाजपा पर 2014 से सत्ता में बने रहने की साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने सांसदों की धांधली की, राजनीतिक दलों को तोड़ा, सरकारों को गिराया और अब “वोटों की चोरी” कर रही है। खड़गे ने कहा, “2014 से सत्ता हथियाने और उसे बरकरार रखने के लिए हर संभव साजिश रची गई है। उन्होंने सांसदों की धांधली की, राजनीतिक दलों को तोड़ा, सरकारों को गिराया और चुनावी बांड, ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल किया, और अब वे वोटों की चोरी कर रहे हैं। हमारे पास वोट चोरी के ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं। ज्ञानेश कुमार 2023 के मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम के कारण इस चोरी को बढ़ावा दे पा रहे हैं। यह विधेयक 145 विपक्षी सांसदों को निलंबित करने के बाद दिसंबर 2023 में पारित किया गया था। यह शर्मनाक और कलंक है। यह कानून चुनाव आयुक्तों को आजीवन सुरक्षा कवच प्रदान करता है- ऐसा संरक्षण जो भारत के राष्ट्रपति या मुख्य न्यायाधीश को भी नहीं मिलता।”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल हटाने की मांग की और उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने का आह्वान किया, उन पर जनता और संविधान के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। खड़गे ने कहा- “यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह द्वारा दिसंबर 2023 में इस सरकार के जरिये मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को दी गई आजीवन कानूनी सुरक्षा, उनके द्वारा राष्ट्र और भारत के संविधान के विरुद्ध किए गए आपराधिक कृत्यों को छिपाने के लिए थी। इसलिए, उन्हें फौरन हटाया जाना चाहिए। भारत की साठ प्रतिशत से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले इंडिया गठबंधन के सांसदों ने 31 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में एकत्रित नागरिकों के साथ मिलकर यह संकल्प लिया कि भारत की जनता के साथ इस घोर विश्वासघात के लिए, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भारत के संविधान के कानूनी ढांचे के अनुसार देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।”
इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह आरोपों वाला एक प्रस्ताव जारी किया, जिसमें संविधान के उल्लंघन और मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप में उन्हें हटाने की मांग की गई।
- 1. पहले आरोप में कुमार पर भाजपा द्वारा राष्ट्रीय और राज्य चुनावों में हेरफेर करने के लिए रची गई कथित आपराधिक साजिश का हिस्सा होने का आरोप लगाया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी को मतदाता सूची तक पहुंचने और चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए मनमाने ढंग से मतदाताओं को जोड़ने या हटाने की अनुमति दी थी।
- 2. ज्ञानेश कुमार को ब्लॉक द्वारा हेरफेरपूर्ण और विनाशकारी एसआईआर प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि 13.2 करोड़ मतदाताओं को जानबूझकर मतदाता सूची से हटा दिया गया, जिससे उनके संवैधानिक मतदान अधिकार का हनन हुआ। इसमें चुनाव आयोग पर पक्षपातपूर्ण और अपारदर्शी तरीके से यह प्रक्रिया चलाने का भी आरोप लगाया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
- 3. केंद्रीय चुनाव आयुक्त पर संसदीय निगरानी या जानकारी के बिना मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के प्रपत्र 6 में अवैध रूप से संशोधन करने का आरोप लगाया गया। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि यह संशोधन पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को पंजीकरण कराने और अपने मतदान अधिकार का प्रयोग करने से रोकने के उद्देश्य से किया गया था।
- 4. आरोप लगाया गया कि कुमार ने ईआरओनेट/ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर के उपयोग के माध्यम से भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के भीतर मतदाता सूची पर केंद्रीकृत नियंत्रण स्थापित किया था। इसमें दावा किया गया कि इससे स्थानीय मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को वैध मतदाताओं को सूची में जोड़ने से रोका गया, जबकि सूची से नाम हटाने में सुविधा प्रदान की गई।
- 5. कुमार पर अन्य दो चुनाव आयुक्तों को निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाहर रखकर कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया। प्रस्ताव के अनुसार, चुनाव आयोग के सात सहयोगी कथित उल्लंघन में शामिल थे, जिसके चलते दो निष्कासित आयुक्तों ने कम से कम 14 आपत्तियां दर्ज कराईं।
• 6. कुमार पर स्वतंत्र रूप से कार्य करने में विफल रहने और संविधान का पालन न करने का आरोप लगाया गया। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि उन्होंने बार-बार विपक्षी दलों को निशाना बनाया, उनके नेताओं को सुनवाई से वंचित किया और उन्हें चुनाव आयोग के समक्ष अपनी चिंताएं उठाने से रोका। इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि जब विपक्षी नेताओं को कथित तौर पर चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया गया और चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर उन पर हमला किया गया, तब वे चुप रहे।
समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को PDA यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों पर सीधा हमला बताया। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया का सबसे ज्यादा असर कमजोर और वंचित तबकों पर पड़ सकता है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने संबोधन में भारत के सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संविधान लागू होने के साथ ही महिलाओं, दलितों, गरीबों और समाज के कमजोर तबकों को वोट देने का अधिकार मिला। उनके मुताबिक, भारत ने आजादी के बाद ही हर वयस्क नागरिक को मतदान का हक दिया, जबकि अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे देशों में यह अधिकार अलग-अलग दौर में विस्तार के साथ मिला। खड़गे ने RSS पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में संघ ने सभी वयस्क नागरिकों को मतदान का अधिकार देने का विरोध किया था। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर भारतीय मतदाताओं का भरोसा तोड़ने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग दोहराई।
श्री खरगे ने कहा कि चुनाव आयोग को यह सार्वजनिक करना चाहिए कि कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए, कितने नए नाम जोड़े गए और किन लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए गए। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों का पूरा विवरण सामने आने पर ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भरोसा कायम हो सकता है और वह इस भरोसे को कम करने में विफल हो रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसी राजनीतिक हित के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों और मतदाता सूची में उनके नाम सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष कर रही है।

महुआ मोइत्रा ने इसे बताया ‘क्रिमिनल ऑपरेशन’ तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने SIR प्रक्रिया पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे ‘क्रिमिनल ऑपरेशन’ बताया और पश्चिम बंगाल में ‘साइलेंट इनविजिबल रिगिंग’ यानी चुपचाप चुनावी हेरफेर किए जाने का आरोप लगाया। महुआ ने कहा कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया के जरिए चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा ) की अध्यक्ष नेहा बोरा भी कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बीजेपी के साथ कथित साजिश करने और अपने पद का दुरुपयोग कर पार्टी को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। नेहा बोरा ने कहा कि यदि सत्ता में बैठे लोग वास्तव में जनता के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो यह महाभियोग संसद के भीतर होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि देशभर में लोग लंबे समय से इस तरह की कार्यवाही की मांग कर रहे हैं। उन्होंने अपनी बात कुछ इस अंदाज़ में रखी “ये नासमझी नहीं है, ये टेक्निकल ग्लिच नहीं है, ये एक इंटेंशनल, सोची-समझी साजिश है इस देश के लोकतंत्र को तार-तार करने की।” अब तक यह आंदोलन एक रिले रेस की तरह आगे बढ़ा है। कभी छात्रों ने कमान संभाली, कभी जनसंगठनों ने, कभी नागरिक समाज ने और अब विपक्ष ने।
कल ये सभी धाराएँ एक साथ उतरेंगी—ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और SIR की वापसी की माँग के साथ
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इंडिया गठबंधन की प्रतीकात्मक कार्यवाही की शुरुआत की। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र की आत्मा पर हमला बताया। कार्यक्रम का प्रारूप संसद में महाभियोग की कार्यवाही जैसा रखा गया। मीरा कुमार ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे सबसे पहले अपनी बात रखेंगे। इसके बाद इंडिया गठबंधन के नेता, नागरिक समाज के प्रतिनिधि और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का दावा करने वाले नागरिक अपनी बात रखेंगे।
इस जनमहाभियोग की सबसे खास बात यह थी कि इसमें ऐसे मतदाताओं ने सबूतों को पेश करते हुए कहा कि उनके नाम वोटर लिस्ट से उड़ा दिये गये। एक महिला ने कहा कि एक तरह उनकी भारतीय नागरिकता छीन ली गई। उनकी बेटी को अब नौकरी कैसे मिलेगी, जब उसके पास इस तरह का कोई सबूत नहीं होगा। बंगाल से आये शख्स ने अपना पासपोर्ट, आधार कार्ड और पुराना मतदाता पहचानपत्र दिखाते हुए कहा कि इतने सबूतों के बावजूद उनका नाम वोटरलिस्ट में नहीं है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चुनाव में कथित धांधली को लेकर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष ज्ञानेश कुमार को जवाबदेही से बचकर निकलने नहीं देगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग चलाने और उन पर देशद्रोह के मुकदमे की मांग का समर्थन किया।राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष संविधान और जनता की आवाज की रक्षा करेगा। उन्होंने इस कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक ‘राजनीतिक हथियार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष न तो बुरा है और न ही किसी के प्रति दुर्भावना रखता है, लेकिन वह संविधान और जनता की आवाज की रक्षा करेगा।उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला करने वाले लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि परिस्थितियां बदल रही हैं। राहुल गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार इस कथित हमले का केवल एक हिस्सा हैं। इसके पीछे और भी लोग हैं, जिन्हें विपक्ष अच्छी तरह जानता है।उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यह एक नया राजनीतिक हथियार है, जो विपक्ष के इस अभियान के रूप में सामने आया है। अगर लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने का सिलसिला जारी रहा तो यह हथियार उनके लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए कहा कि चुनावों में कथित धांधली का खेल शीर्ष स्तर पर चल रहा है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को मोदी और शाह का ‘औजार’ बताया। राहुल गांधी ने कहा कि इंडिया गठबंधन रविवार, 1 नवंबर को दिल्ली की सड़कों पर अपना अभियान तेज करेगा। विपक्ष की प्रस्तावित मार्च और रैली दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित किए जाएंगे। यह कार्यक्रम ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत हो रहा है। राहुल गांधी ने राजनीतिक दलों, नागरिक समाज संगठनों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की है। इंडिया गठबंधन का आरोप है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता प्रभावित हुई है और मतदाता सूची में कथित हेरफेर के जरिए चुनावी प्रक्रिया को कमजोर किया जा रहा है।
दिल्ली की सड़कों पर उमड़ी भीड़ सिर्फ कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार के खिलाफ जनता की आवाज़ है। राहुल गांधी के साथ उमड़ा जनसैलाब बता रहा है कि लोकतंत्र की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, न डर खत्म हुआ है और न विपक्ष की आवाज़ दबने वाली है। सत्ता कितनी भी ताकत लगा ले, जनता जब सड़कों पर उतरती है तो बड़े–बड़े सिंहासन हिल जाते हैं!






