चौथा अक्षर संवाददाता/ नई दिल्ली
दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी संबंद्ध कॉलेजों में छात्रों के लिए हॉस्टल (छात्रावास) बनाने की मांग ने दक्षिण कैंपस के सत्य निकेतन इलाके में एक पीजी (पेइंग गेस्ट) इमारत के ढहने की दुर्घटना के बाद तूल पकड़ा है।डीयू के लगभग 91 कॉलेजों में से 71 से अधिक कॉलेजों में हॉस्टल की सुविधा नहीं है। विश्वविद्यालय में हर साल हजारों छात्र बाहर से पढ़ने आते हैं, लेकिन कुल सीटें मात्र 7,000 के आसपास ही उपलब्ध हैं। फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस (शिक्षक संगठन) ने दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता व शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद से दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध तथा दिल्ली सरकार से वित्त पोषित 16 कॉलेजों व पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों में विभिन्न राज्यों से आने छात्रों के लिए छात्रावास ( हॉस्टल) बनाने की मांग की है। बता दें कि दिल्ली सरकार के इन कॉलेजों के परिसर में अतिरिक्त भूमि खाली पड़ी है, जिसका ये कॉलेज कोई उपयोग नहीं कर रहे हैं। जिन कॉलेजों में छात्रों के लिए छात्रावास नहीं है यदि खाली पड़ी इस भूमि पर छात्रावास बना दिए जाएं तो इससे कॉलेज को भी लाभ होगा और छात्रों को कॉलेज से बाहर पी.जी.( पेइंग गेस्ट ) में जाने से बचेंगे। इससे छात्रों के समय की बचत के साथ उन्हें कम कीमत पर छात्रावास मिल सकेगा , साथ ही कॉलेज में सुरक्षा का वातावरण भी बना रहेगा। उन्होंने दिल्ली सरकार के कॉलेजों में छात्रों के लिए छात्रावास ( हॉस्टल ) की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जल्द से जल्द कॉलेज प्रबंध समिति की बैठक बुलाकर छात्रों के लिए छात्रावास बनाने का प्रस्ताव पास कर सरकार से अतिरिक्त अनुदान की मांग करनी चाहिए ताकि छात्रावास बनाएं जा सके ।
फोरम के चेयरमैन प्रोफेसर हंसराज सुमन ने दिल्ली की मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को लिखे पत्र में बताया है कि दिल्ली सरकार के 28 कॉलेजों में छात्रों के लिए छात्रावास ( हॉस्टल) बनाने की इसलिए भी आवश्यकता है क्योंकि इन कॉलेजों में अध्ययन करने वाले छात्रों का एक बहुत बड़ा समूह है जो दिल्ली के बाहर से आकर इन कॉलेजों में प्रवेश लिया है । इन छात्रों में कुछ छात्र तो ऐसे हैं जो किराए के मकानों में रहते हैं या कुछ ऐसे हैं जो कॉलेज के आसपास बने पी.जी. आदि में रहने को मजबूर है । उन्होंने बताया है कि हाल ही में दिल्ली सरकार से वित्त पोषित 16 कॉलेजों व पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों में हजारों छात्रों ने शैक्षिक सत्र -2026-27 में प्रवेश लिया है । प्रवेश लेने वाले छात्रों में ज्यादातर छात्र बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, झारखंड , नार्थ ईस्ट, मध्यप्रदेश , उत्तराखंड व उड़ीसा आदि राज्यों से हैं। प्रोफेसर सुमन ने बताया कि दिल्ली सरकार के इन कॉलेजों में अपने छात्रावास न होने के कारण छात्रों को अपने कॉलेजों से दूर बने फ्लैट्स या पीजी में रहना पड़ रहा है। कॉलेज से इनकी दूरी 10 से 20 किलोमीटर या इससे अधिक होती है। दिल्ली के भीड़ भाड़ के ट्रैफिक में आवा-गमन करने में काफी वक्त बर्बाद हो जाता है। नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, बल्लभगढ़, गाजियाबाद, मेरठ , रोहतक बहादुरगढ़, पानीपत आदि शहरों से आने वाले छात्रों के लिए आवागमन थका देने वाला होता है। दिल्ली में सभी छात्रों के लिए फ्लैट्स या पीजी में रहना आसान नहीं है। किराए के आवास भी ऊँचे दाम के हैं। दूर के राज्यों से आए छात्रों के लिए दिल्ली सरकार के कॉलेजों में छात्रावास सुविधा नगण्य है।
प्रोफेसर सुमन ने मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को बताया है कि यदि दिल्ली सरकार अपने इन कॉलेजों में छात्रों के लिए छात्रावास बना देता है तो कॉलेज को भी इसका लाभ मिलेगा और छात्रों को किराए की बचत भी होगी। उन्होंने बताया है दिल्ली सरकार ने अपने कुछ कॉलेजों में छात्रावास बनाए हुए है लेकिन ऐसे कॉलेजों की संख्या बहुत कम है। प्रोफेसर सुमन का कहना है कि स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज, राजधानी कॉलेज, शिवाजी कॉलेज, शहीद भगतसिंह कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज, कालिंदी कॉलेज, मैत्रीय कॉलेज, गार्गी कॉलेज, कमला नेहरू कॉलेज, भगिनी निवेदिता कॉलेज, भारती कॉलेज, इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉलेज, भाष्कराचार्य कॉलेज ऑफ अप्लाइड साइंस, आचार्य नरेंद्रदेव कॉलेज आदि में इतनी जमीन खाली पड़ी है कि वहां छात्रों के लिए छात्रावास बनाया जा सकता है । यदि प्रशासन पहल करे तो इन कॉलेजों की प्रबंध समिति अपनी मीटिंग बुलाकर छात्रों के लिए छात्रावास ( हॉस्टल ) बनाने का प्रस्ताव पास कर सकती है। जिसे दिल्ली सरकार को भेज कर अनुमति ली जा सकती है और अपने छात्रों के लिए उन्हें अपने ही कॉलेज में छात्रावास की सुविधाएँ मिल सकती हैं।






