• करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और महाकुंभ की यादों से जुड़ी कलाकृतियों की सुरक्षा पर सवाल, डमरू के मनके-डोरी और कलाकृति की पंखुड़ियां उखाड़ीं
“चौथा अक्षर” के लिए प्रयागराज से पुष्पेंद्र यादव की खास रिपोर्ट –
प्रयागराज। महाकुंभ 2025 के दौरान प्रयागराज को भव्य और आकर्षक स्वरूप देने के लिए शहर के प्रमुख मार्गों और सार्वजनिक स्थलों को खूबसूरत कलाकृतियों से सजाया गया था। इसी क्रम में काशी की ओर से प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत और आकर्षण के लिए झूंसी के त्रिवेणीपुरम रेलवे ओवरब्रिज के पास स्थित छोटे से पार्क में विशालकाय डमरू, त्रिशूल समेत कई आकर्षक कलाकृतियां स्थापित की गई थीं। महाकुंभ समाप्त होने के बाद इन धरोहरों की देखरेख और सुरक्षा में लापरवाही के चलते अब इनके अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है।
पार्क में स्थापित विशालकाय डमरू कभी राहगीरों और श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र था। यूपी जल निगम की ओर से गाजियाबाद की एक कंपनी से तांबा और कांस्य मिश्रित धातु से तैयार कराया गया यह डमरू करीब तीन टन वजनी, 13 फीट चौड़ा और आठ फीट ऊंचा बताया गया है। लगभग 10 फीट ऊंचे चबूतरे पर स्थापित यह डमरू अपनी भव्यता के कारण लंबे समय तक लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।
लेकिन अब शरारती तत्वों ने इसकी खूबसूरती को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। आरोप है कि पहले डमरू के पास स्थापित त्रिशूल को क्षतिग्रस्त किया गया। इसके बाद डमरू पर उकेरे गए कलात्मक मनके और डोरी भी उखाड़ लिए गए। अब पार्क के पूर्वी छोर पर स्थापित आकर्षक कलाकृति की पंखुड़ियों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। लगातार हो रही तोड़फोड़ से स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
प्रयागराज में बदहाल पड़ा महाकुंभ की धरोहर डमरू
महाकुंभ जैसे ऐतिहासिक आयोजन की स्मृतियों से जुड़ी इन कलाकृतियों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोग अब सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि लाखों रुपये की लागत से तैयार कराई गईं इन कलाकृतियों को यूं ही असुरक्षित छोड़ दिया जाना उचित नहीं है। यदि समय रहते निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में इनकी स्थिति और खराब हो सकती है।
स्थानीय पार्षद अनिल कुमार यादव, अधिवक्ता राजीव वर्मा, शिक्षक कमलेश त्रिपाठी, करुणा शंकर दुबे, मुन्ना पंडित, बृजेश त्रिपाठी श्रीमुख, डीएस मौर्य, सुरेंद्र भारती, दिनेश मिश्र, अधिवक्ता सजन यादव, सुरेंद्र सिंह, अनिल राय और देवीचंद केसरवानी समेत अन्य लोगों ने नाराजगी जताई है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि महाकुंभ की इन महत्वपूर्ण स्मृतियों और सार्वजनिक संपत्तियों की तत्काल मरम्मत कराई जाए। साथ ही ऐसे स्थलों पर नियमित निगरानी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, जिससे दोबारा कोई शरारती तत्व इन कलाकृतियों को नुकसान न पहुंचा सके।
लोगों ने मुख्यमंत्री से भी मामले का संज्ञान लेकर संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने की अपील की है। उनका कहना है कि महाकुंभ की भव्यता से जुड़ी ये कलाकृतियां केवल सजावट का हिस्सा नहीं, बल्कि प्रयागराज में आयोजित भव्य आयोजन की यादों की निशानी हैं। इनकी उपेक्षा से शहर की सुंदरता के साथ महाकुंभ की यादें भी धूमिल हो रही हैं।






