चौथा अक्षर संवाददाता/ नई दिल्ली
कल युवा छात्रों के साथ हुई बर्बरता के बारे में जवाब मांगने के लिए हम प्रधानमंत्री मोदी के घर तक मार्च कर रहे हैं। सरकार न तो इसकी कोई ज़िम्मेदारी लेना चाहती है और न ही संसद में इस पर कोई बहस करना चाहती है। भारत के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।
दिल्ली पुलिस ने कल सारी हदे पार कर दी , पुलिस कमिश्नर बताएँ ये लोग कौन हैं जो पुलिस के साथ लाठी लेकर आए थे ? इनको सिविल कपड़ो में लाठीचार्ज की अनुमति किसने दी। हमारे देश के बच्चों पर लाठियों, आसु गैस के गोलों चलवा युवाओं की आवाज़ नहीं दबाई जा सकती। ये छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है, जिन्हें मारा-पीटा जा रहा है, जो ठीक नहीं है। नरेंद्र मोदी ने इसके लिए माफी तक नहीं मांगी है।
ये युवा देश की ध्वस्त हो चुकी शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं – इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली ? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए – तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद – और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं। यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही – उनपर टूट पड़ी है। देश का छात्र कह रहा है – “हमारा कोई भविष्य नहीं।” और इस सरकार के मंत्री कह रहे हैं – “हमारी कुर्सी नहीं जाएगी।”
जिस देश में छात्र भविष्य खो दे और मंत्री कुर्सी न खोए – वहां न्याय है ही नहीं।
प्रधानमंत्री आवास पर धरना देते विपक्ष के नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस के अन्य नेता गण
कल की घटना में घायल हुए छात्रों से राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मिलने के लिए जाते राहुल गांधी
जब-जब दुनिया में अत्याचार और जुल्म बढ़ता है, तब-तब इंसानियत की रक्षा और अन्याय के अंत के लिए बदलाव की लहर उठती है।अन्याय के खिलाफ यह आवाज हमेशा गूंजती है:”जब-जब अत्याचार और जुल्म होगा, तब-तब एक नई क्रांति का जन्म होगा।”इतिहास गवाह है कि जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना ही लोकतंत्र और मानवीय अधिकारों की असली ताकत है।






