वाराणसी: शहर के कैंट इलाके में स्थित रोडवेज बस स्टेशन को आधुनिक और हाईटेक सुविधाओं से लैस करने की योजना फिलहाल जमीन की समस्या के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही है। बस स्टेशन को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित करने की तैयारी लंबे समय से चल रही है, लेकिन स्टेशन और रोडवेज कार्यालय को अस्थायी रूप से स्थानांतरित करने के लिए उपयुक्त जमीन नहीं मिल पाने से परियोजना अटक गई है।
छह साल बाद कार्यदाई संस्था का चयन ?
कैंट रोडवेज बस स्टेशन के पुनर्विकास की योजना को शासन से मंजूरी मिले करीब छह वर्ष बीत चुके हैं। लंबे इंतजार और कई स्तरों पर चली प्रक्रिया के बाद परियोजना के लिए कार्यदाई संस्था का चयन किया गया। इसके बाद उम्मीद जगी थी कि स्टेशन के पुनर्विकास का काम जल्द शुरू हो सकेगा। हालांकि, निर्माण कार्य शुरू करने से पहले मौजूदा बस स्टेशन और कार्यालय को दूसरी जगह स्थानांतरित करना जरूरी है। इसी वजह से रोडवेज प्रशासन ने जिला प्रशासन से वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने के लिए कई बार संपर्क किया।
लहरतारा की जमीन पर भी नहीं बनी बात ?
रोडवेज प्रशासन की ओर से वैकल्पिक स्थान तलाशने की प्रक्रिया में लहरतारा स्थित जल विहार कॉलोनी की खाली जमीन का प्रस्ताव सामने आया था। कुछ समय पहले इस जमीन को अस्थायी तौर पर इस्तेमाल करने को लेकर सहमति बनने की उम्मीद जगी थी। लेकिन बाद में पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन की ओर से भी इस जमीन को लेकर सहमति नहीं बन सकी। इसके चलते रोडवेज के सामने एक बार फिर वैकल्पिक जमीन की समस्या खड़ी हो गई।
अब किराये की निजी जमीन का विकल्प ?
सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में रोडवेज प्रशासन अब निजी संपत्ति को किराये पर लेने के विकल्प पर विचार कर रहा है। हालांकि, इसके लिए जमीन का उपयुक्त होना, बसों की आवाजाही, यात्रियों की सुविधा और कार्यालय संचालन जैसी कई बातों को ध्यान में रखना होगा।
कैंट बस स्टेशन वाराणसी के प्रमुख परिवहन केंद्रों में शामिल है। यहां से शहर और आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूसरे जिलों के लिए भी बड़ी संख्या में बसों का संचालन होता है। ऐसे में स्टेशन को अस्थायी रूप से स्थानांतरित करने के लिए ऐसी जगह की जरूरत होगी जहां यात्रियों और बसों दोनों के लिए पर्याप्त व्यवस्था हो PPP मॉडल के तहत प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य कैंट रोडवेज बस स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से विकसित करना है। परियोजना के आगे बढ़ने पर यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
लेकिन मौजूदा स्थिति में जमीन की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। जब तक बस स्टेशन और कार्यालय के लिए वैकल्पिक स्थान तय नहीं होता, तब तक पुनर्विकास परियोजना को गति मिलना मुश्किल माना जा रहा है। अब रोडवेज प्रशासन के सामने जल्द से जल्द उपयुक्त जमीन तलाशने की चुनौती है। यदि निजी जमीन किराये पर लेने का विकल्प आगे बढ़ता है, तो उसके बाद स्थानांतरण और निर्माण से जुड़ी अगली प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। वाराणसी के कैंट रोडवेज बस स्टेशन को हाईटेक बनाने की योजना कागज पर आगे बढ़ने के बावजूद जमीन की समस्या से जूझ रही है। छह साल से अधिक समय से चल रही प्रक्रिया के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन वैकल्पिक जमीन कब उपलब्ध कराता है और बहुप्रतीक्षित पुनर्विकास परियोजना कब धरातल पर उतरती है।






