श्याम लाल शर्मा/ नई दिल्ली/ छाया – आशीष कर /आर बी यादव
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक लोकसभा में प्रतिपक्ष का नेता राहुल गांधी और उसके साथ 200 से ज़्यादा विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त के त्यागपत्र को लेकर आज 6 अक्टूबर को संसद से मुख्य चुनाव कार्यालय पहुंचकर अपना ज्ञापन देना चाह रहे थे, लेकिन सुबह से ही मुख्य चुनाव कार्यालय और उसके आसपास का इलाका छावनी में तब्दील कर दिया गया था,चुनाव आयोग के दफ्तर की तरफ जाने वाली सारी सडकों और चौराहों पर पुलिस और पैरामिलिट्री के सैकड़ों जवान खड़े कर दिये गये थे । प्रधानमंत्री के बंगले से भी ज्यादा कडे सुरक्षा बंदोबस्त मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के दफ्तर पर किये गये थे . विपक्षी सदस्य देश के चुनाव आयोग के उच्चाधिकारियों से मिलकर अपनी चुनावी धांधली को लेकर चिंता या शिकायत दर्ज कराने संसद भवन से जुलूस बनाकर निकले पर कुछ ही देर बाद संसद मार्ग पर आकाशवाणी भवन के आस-पास ही उनको रोक दिया गया और पुलिस द्वारा उन्हें हिरासत में लिया जाने लगा ! इसी दौरान जब सारे सांसदों को बस में भर लिया गया, तो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी चकमा देते हुए बस से नीचे उतर गए। उसी समय आकाशवाणी के तमाम कर्मचारी उन्हें देखकर हाथ हिला रहे थे। राहुल गांधी आकाशवाणी भवन के अंदर चले गए। उनके पीछे प्रियंका गांधी भी अंदर पहुंच गईं। दोनों लोग आकाशवाणी भवन के पिछले गेट से चुनाव आयोग के दफ़्तर जा रहे थे, जो बगल में ही है, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया। फिर वे आकाशवाणी भवन में ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि ‘मैंने पुलिस से कहा, ‘मैं थोड़ी देर पहले वहाँ बैठा था। आपने मुझे वहाँ से हटा दिया। अब मैं यहाँ (आकाशवाणी भवन) आ गया हूँ, और आप मुझे यहाँ से भी हटाना चाहते हैं।’ मैं पुलिस से बस इतना पूछ रहा हूँ- ठीक है, अगर आप मुझे यहाँ से हटाना चाहते हैं, तो हटा लीजिए, लेकिन बस मुझे बताइए इस देश में मैं कहाँ बैठ सकता हूँ? मैं बस कहीं बैठना चाहता हूँ। मैंने पुलिस से विनम्रतापूर्वक पूछा- कृपया मुझे बताइए कि मैं कहाँ बैठ सकता हूँ। क्या मैं इंडिया गेट पर बैठ सकता हूँ? क्या मैं जंतर-मंतर पर बैठ सकता हूँ? क्या मैं सड़क पर बैठ सकता हूँ? मैं कहाँ बैठ सकता हूँ? बस एक जगह बता दीजिए, और मैं वहाँ बैठ जाऊँगा।’ आकाशवाणी भवन चुनाव आयोग के पास है और आकाशवाणी के सारे गेट बंद कर दिए गए हैं।
इस समय शाम के 6 बज रहे हैं और नेता विपक्ष राहुल गांधी का विपक्षी सांसदों के साथ आकाशवाणी परिसर में धरना जारी है।आकाशवाणी भवन में पवन खेड़ा, इमरान प्रतापगढ़ी, शफी परम्बिल समेत कई कांग्रेस नेता भी मौजूद हैं। ये लोग आकाशवाणी भवन के रास्ते से चुनाव आयोग के दफ्तर जाना चाहते थे। पुलिस ने इन्हें फिलहाल रोका हुआ है। डीसीपी नई दिल्ली मौके पर पहुंचीं और राहुल गांधी को वहां से जाने का अनुरोध कर रही हैं। वहां पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और कांग्रेस के अन्य नेता मौजूद हैं। मौके पर दरी और कालीन मंगा लिये गये हैं। इससे लग रहा है कि राहुल गांधी का धरना देर तक चलने वाला है। इससे पहले इंडिया गठबंधन के सभी बड़े नेताओं को हिरासत में लिया गया और बाद में रिहा कर दिया। इनमें सपा प्रमुख अखिलेश यादव, डेरेक ओब्रायन, अभिषेक बनर्जी, सीपीएम, सीपीआई के नेता शामिल थे।
ज्ञानेश कुमार और दोनों आयुक्त विपक्ष के प्रतिनिधिमंडल से मिलने में क्यों संकोच कर रहे हैं ? आखिरकार वे एक सरकारी मुलाजिम हैं चुनाव संपन्न कराते हैं, फिर चुनाव लडने वाली विपक्षी पार्टियों के एक-एक प्रतिनिधियों के साथ वे क्यों नहीं मिल सकते थे? प्रदर्शन में शामिल अन्य सांसद बाहर रहते और उनके शीर्ष नेता अंदर जाकर चुनाव आयुक्तों से मिल लेते! आयोग अपने एक प्रतिनिधि के जरिये विपक्ष के नेताओं को अपनी तरफ से यह ऑफर करता तो उसके पास कहने को तो होता कि हमने मिलने से इंकार नहीं किया! पर यहां तो चुनाव आयोग के आयुक्त विपक्ष के शीर्ष नेतृत्व मिलने तक को तैयार नहीं! आखिर, इसमें चुनाव आयुक्तों को या उन्हें नियुक्त करने वाली सरकार को क्या आपत्ति थी? इन विपक्षी सांसदों में ऐसे-ऐसे लोग हैं, जो अनेक बार केंद्रीय मंत्री और कुछ तो मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं. साथ में अखिलेश यादव हैं जो देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी सहित विभिन्न विपक्षी पार्टियों के अनेक सांसद मौजूद हैं.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भारत ब्लॉक के विरोध मार्च के लिए आज सुबह दिल्ली पहुंचे। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग के मामले में यह कोई नया मुद्दा नहीं है। चुनाव आयोग और उसके कामकाज के खिलाफ शिकायतें और आपत्तियां पहली बार नहीं उठाई जा रही हैं। ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग का मानना है कि केवल भारतीय जनता पार्टी के सदस्य ही भारतीय नागरिक हैं।” उन्होंने आगे कहा कि कई मौकों पर ऐसा प्रतीत होता है कि चुनाव आयोग का यह भी मानना है कि केवल भाजपा के सदस्यों को ही वोट देने का अधिकार है। उन्होंने कहा, “लोग कहते थे कि भाजपा एक चुनावी मशीन की तरह काम करती है और केवल चुनावी प्रक्रिया से चुनाव नहीं जीतती। उसके पास बहुत पैसा है। बंगाल में हमने देखा कि कैसे बल प्रयोग करके बूथों पर कब्जा किया गया। और यह केवल बंगाल में ही नहीं हुआ। इससे पहले उत्तर प्रदेश में भी ऐसा हुआ था।” अखिलेश के मार्च में शामिल होने से उन तत्वों को धक्का लगा है जो इंडिया गठबंधन में दरार की अफवाहें फैला रहे थे।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने सवाल उठाया कि सांसदों के लिए इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की क्या जरूरत है। उन्होंने कहा, “उन्होंने सीमा सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) तैनात किया है और संसद भवन से निर्वाचन सदन तक हजारों सीआईएसएफ कर्मियों को भेजा है। मुझे अभी पता चला है कि सभी मंत्रियों के घरों के बाहर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इसकी क्या जरूरत है? हम सांसद हैं। हम संसद सदस्य हैं। हम इस देश के नागरिक भी हैं। हमें रोकने के लिए इतनी बड़ी संख्या में बल तैनात करने की क्या जरूरत है? हम पैदल ही जाएंगे। हम निहत्थे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हम निर्वाचन सदन जाकर ज्ञानेश कुमार से कहना चाहते हैं, ‘भाई, इस्तीफा दे दीजिए। आपने देश के साथ बहुत गलत किया है। आप देश के दुश्मन हैं।’” सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आप झूठे व्यक्ति हैं। सुप्रीम कोर्ट को फॉर्म 6 में किए गए बदलावों की जानकारी नहीं थी, क्या ऐसा था? सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फॉर्म 6 में बदलाव गुप्त रूप से किए गए थे, और ज्ञानेश कुमार कह रहे थे कि उन्हें इसकी जानकारी थी। इसलिए, वह झूठे हैं।उन्होंने आगे कहा “ऐसे व्यक्ति को कोई नैतिक अधिकार नहीं है”।



अभी-अभी पता चला है कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित कई नेताओं को हिरासत में ले लिया गया है।






