भारत की एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) नीति को लेकर भारतीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद (ICRIER) ने अधिक लचीला रुख अपनाने की सलाह दी है। संस्थान के नए शोध पत्र में कहा गया है कि E20 को दीर्घकालिक लक्ष्य बनाए रखते हुए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें घरेलू एथेनॉल की उपलब्धता कम होने या E20 बनाए रखने की आर्थिक लागत बहुत अधिक बढ़ने पर कुछ समय के लिए मिश्रण का स्तर E15 किया जा सके।
एथेनॉल नीति में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव की जरूरत ?
ICRIER का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण को एक निश्चित स्तर पर बनाए रखने के बजाय बाजार और कृषि परिस्थितियों को भी नीति में महत्व दिया जाना चाहिए। शोध पत्र के मुताबिक, किसी समय E20 जारी रखना, एथेनॉल का आयात करना या अस्थायी तौर पर मिश्रण घटाकर E15 करना—इनमें से कौन सा विकल्प बेहतर है, इसका फैसला उस समय की आर्थिक लागत और उपलब्धता को देखकर किया जाना चाहिए। यह सुझाव ऐसे समय आया है जब भारत ने 2025-26 के एथेनॉल सप्लाई ईयर में पेट्रोल में 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार भारत ने निर्धारित समय से पांच साल पहले E20 लक्ष्य हासिल किया।
ICRIER के शोध पत्र ‘Food vs Fuel: Recalibrating India’s Ethanol Blending Strategy’ में एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली कृषि उपज को लेकर भी चिंता जताई गई है। एथेनॉल उत्पादन में गन्ना, मक्का और चावल जैसे कृषि उत्पादों का इस्तेमाल होता है। ऐसे में यदि ईंधन की जरूरत के लिए इन फसलों की मांग तेजी से बढ़ती है, तो खाद्य बाजार पर दबाव पड़ने की संभावना रहती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2019-20 से 2025-26 के बीच तेल कंपनियों को एथेनॉल की आपूर्ति में तेज वृद्धि हुई, जबकि एथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कृषि उत्पादों का उत्पादन तुलनात्मक रूप से धीमी गति से बढ़ा। इससे ‘फूड बनाम फ्यूल’ का संतुलन एक महत्वपूर्ण नीति मुद्दा बन गया है।
आयात और वैकल्पिक स्रोतों पर भी जोर ?
शोध पत्र में एथेनॉल की कमी के समय आयात को एक संभावित विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने की बात कही गई है। साथ ही, कृषि परिस्थितियों के अनुसार फीडस्टॉक के आवंटन में लचीलापन बढ़ाने की सलाह दी गई है। ICRIER ने लंबे समय में सेकंड जेनरेशन (2G) एथेनॉल को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है, जो कृषि अवशेष और गैर-खाद्य बायोमास से बनाया जा सकता है। इससे खाद्य फसलों और ईंधन उत्पादन के बीच प्रतिस्पर्धा कम करने में मदद मिल सकती है।
E20 लक्ष्य बरकरार, लेकिन रास्ता लचीला हो ?
ICRIER की सिफारिश का मुख्य उद्देश्य E20 लक्ष्य को खत्म करना नहीं, बल्कि उसे अधिक व्यावहारिक और परिस्थितियों के अनुरूप बनाना है। शोध पत्र में कहा गया है कि अस्थायी कृषि संकट या एथेनॉल आपूर्ति में कमी के दौरान E15 का विकल्प नीति को झटकों से निपटने में मदद कर सकता है, जबकि दीर्घकाल में E20 का लक्ष्य जारी रखा जा सकता है।
ICRIER का सुझाव भारत की एथेनॉल नीति में ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय, खाद्य उपलब्धता और आर्थिक लागत के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित है। आने वाले समय में सरकार इस तरह के लचीले विकल्पों पर कितना विचार करती है, यह देश की जैव ईंधन नीति की दिशा के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।






