NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित IPO के बीच उसके शेयरों की अपने ही प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग को लेकर चल रही चर्चाओं पर SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि NSE की ओर से अपने प्लेटफॉर्म पर शेयरों की ट्रेडिंग की अनुमति लेने के लिए SEBI को फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं मिला है और मौजूदा व्यवस्था में ऐसी ट्रेडिंग की अनुमति नहीं है।
NSE की लिस्टिंग BSE पर होगी ?
NSE का मौजूदा IPO स्ट्रक्चर BSE पर लिस्टिंग के अनुरूप है। NSE के आधिकारिक ऑफर डॉक्यूमेंट्स में BSE की इन-प्रिंसिपल लिस्टिंग अप्रूवल भी दर्ज है। इसका मतलब है कि IPO के बाद NSE के शेयरों की औपचारिक लिस्टिंग NSE पर नहीं, बल्कि दूसरे मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE पर होगी।
अपने ही एक्सचेंज पर लिस्टिंग में क्या है दिक्कत?
स्टॉक एक्सचेंज कोई सामान्य कंपनी नहीं होता। वह बाजार में होने वाले ट्रेडिंग कारोबार के संचालन और निगरानी की महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर कोई एक्सचेंज अपने ही शेयरों को अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्ट और ट्रेड कराए, तो उसके सामने नियामकीय और हितों के टकराव से जुड़े सवाल उठ सकते हैं। मौजूदा SEBI नियमों के तहत किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज को अपने ही प्लेटफॉर्म पर अपने शेयर लिस्ट करने की अनुमति नहीं है। इसी वजह से NSE के IPO के लिए BSE लिस्टिंग का रास्ता अपनाया गया है।
क्या NSE भविष्य में अपने प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग की मांग कर सकता है?
इस विषय पर बाजार में पहले से चर्चा होती रही है। अगस्त में कुछ रिपोर्टों में बताया गया था कि NSE के शेयरों को BSE पर लिस्ट करने के बाद अपने प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग की अनुमति लेने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। हालांकि उस समय भी यह स्पष्ट था कि इसके लिए SEBI की अनुमति जरूरी होगी। लेकिन 17 सितंबर 2026 को SEBI चेयरमैन के ताजा बयान के मुताबिक फिलहाल NSE की तरफ से ऐसा कोई औपचारिक प्रस्ताव या पत्र SEBI को नहीं मिला है।
NSE का ₹22,569 करोड़ का IPO ?
NSE का IPO 17 सितंबर 2026 को खुला और 21 सितंबर तक सब्सक्रिप्शन के लिए उपलब्ध रहेगा। इश्यू का आकार करीब ₹22,569 करोड़ है और इसमें 12.64 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री मौजूदा शेयरधारकों की ओर से की जा रही है। प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर रखा गया है। यह एक Offer for Sale (OFS) है। इसलिए IPO से मिलने वाली राशि NSE कंपनी के पास नई पूंजी के रूप में नहीं जाएगी, बल्कि बिक्री करने वाले मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगी।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब?
NSE की BSE पर लिस्टिंग का मतलब है कि IPO के बाद निवेशक NSE के शेयरों में BSE के माध्यम से कारोबार कर सकेंगे। फिलहाल NSE के अपने प्लेटफॉर्म पर उसके शेयरों की ट्रेडिंग को लेकर कोई स्वीकृत व्यवस्था नहीं है। NSE IPO के साथ सेल्फ-लिस्टिंग और सेल्फ-ट्रेडिंग का मुद्दा बाजार में चर्चा का विषय जरूर रहा है, लेकिन SEBI चेयरमैन के 17 सितंबर के बयान से वर्तमान स्थिति स्पष्ट है—NSE ने अपने प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग की अनुमति के लिए कोई प्रस्ताव नहीं दिया है और मौजूदा नियमों में इसकी अनुमति नहीं है। IPO की प्रस्तावित औपचारिक लिस्टिंग BSE पर होगी।






