Business Success Story: बड़े कारोबार की शुरुआत हमेशा बड़ी पूंजी से ही हो, यह जरूरी नहीं है। कुछ कारोबारी ऐसे भी रहे हैं जिन्होंने छोटी बचत, मेहनत और काम सीखने की लगन के दम पर अपनी पहचान बनाई। नोएडा के कारोबारी परिवार की ऐसी ही कहानी सामने आती है, जहां शुरुआती दौर में 50-50 रुपये की बचत से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और कूलर की रिपेयरिंग तक का अनुभव हासिल किया गया। करीब 25 साल के सफर में यह कारोबार थर्मोकूल होम अप्लायंसेज लिमिटेड तक पहुंचा, जिसका कारोबार करीब 300 करोड़ रुपये बताया गया है।
पांचवीं कक्षा से शुरू हुआ काम का अनुभव ?
कंपनी से जुड़े तनुज गुप्ता के मुताबिक, उनके पिता राजीव गुप्ता ने पढ़ाई के साथ कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था। शुरुआती दिनों में उन्होंने किराना यानी परचून की दुकान पर काम किया। कमाई बहुत ज्यादा नहीं थी, लेकिन इसी आय में से वह नियमित रूप से 50-50 रुपये बचाने की कोशिश करते थे। यह छोटी बचत आगे चलकर उनके कारोबारी सफर की शुरुआती पूंजी बनी। शहर आने के बाद उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में काम किया और इसी दौरान उन्हें कूलर असेंबल करने तथा उनकी सर्विसिंग का व्यावहारिक अनुभव मिला।
सिर्फ 25 हजार रुपये से कारोबार की नींव ?
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 25 साल पहले कारोबार की शुरुआत लगभग 25 हजार रुपये की जमापूंजी से हुई थी। शुरुआत इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट्स के साथ हुई और इसके बाद मेटल कूलर के निर्माण पर ध्यान दिया गया। बाजार और ग्राहकों की पसंद बदलने के साथ कंपनी ने प्लास्टिक कूलर की दिशा में भी कदम बढ़ाया। यानी कारोबार का विस्तार एक साथ नहीं हुआ। पहले उत्पाद और बाजार को समझा गया, फिर धीरे-धीरे प्रोडक्ट रेंज और कारोबार का दायरा बढ़ाया गया।
छोटे काम से मिली बड़ी कारोबारी सीख ?
इस कहानी की खास बात यह है कि शुरुआती दौर में सिर्फ पैसे जमा करने पर ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि काम को समझने पर भी जोर रहा। इलेक्ट्रॉनिक्स की रिपेयरिंग, कूलर असेंबलिंग और ग्राहकों की जरूरतों को नजदीक से देखने का अनुभव बाद के कारोबार में काम आया। समय के साथ कंपनी ने अपनी प्रोडक्ट रेंज का विस्तार किया। रिपोर्टों में कंपनी के पास 150 से 200 से अधिक SKU होने की बात कही गई है। कोविड के बाद परिवार की नई पीढ़ी भी कारोबार से जुड़ी और कंपनी ने अपने विस्तार पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया। इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में ग्राहक व्यवहार भी तेजी से बदला है। अब ग्राहक खरीदारी से पहले ऑनलाइन प्रोडक्ट की कीमत, फीचर्स और दूसरे विकल्पों की जानकारी हासिल करता है। इसके बावजूद कूलर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदते समय कई ग्राहक दुकान पर जाकर डिजाइन, रंग और क्वालिटी को प्रत्यक्ष रूप से देखना पसंद करते हैं।
50 रुपये की बचत से 300 करोड़ तक का सफर ?
यह कहानी बताती है कि कारोबार का सफर केवल शुरुआती पूंजी पर निर्भर नहीं करता। छोटी बचत, काम सीखने की इच्छा, बाजार को समझना और समय के साथ उत्पादों में बदलाव करना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 50-50 रुपये की बचत और छोटे स्तर के काम से शुरू हुआ सफर आज करीब 300 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंचने की कहानी बन चुका है। यह आंकड़ा कंपनी के बताए/रिपोर्ट किए गए टर्नओवर को दर्शाता है, न कि कंपनी का मुनाफा या वैल्यूएशन।






