श्याम लाल शर्मा/चौथा अक्षर/नई दिल्ली
सोनम वांगचुक ने अपने हाथ से लिखी एक पर्ची जारी की है 20 जुलाई आजादी का दूसरा आंदोलन. भय मुक्त भारत अन्याय मुक्त भारत. राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर जुटे छात्र और प्रदर्शनकारी संसद की ओर पैदल मार्च करने की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट एडवाइजरी जारी करते हुए लोगों से अनधिकृत जुलूस या सभा में शामिल न होने की अपील की है।
उल्लेखनीय है कि शनिवार को सुबह सुबह पुलिस के जवान सफेद कपड़ा लिए,सफेद कपड़ों में बड़े ही नाटकीय तरीक़े से सोनम वाग्चुक को जंतर मंतर से उठा ले गए और उनको सफ़दर जंग अस्पताल में भर्ती करा दिया वे पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर थे और उनकी हालत काफ़ी नाजुक हो गई थी. जैसे ही यह खबर फैली लोगों खासकर छात्रों में गुस्सा भड़क उठा.
जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक और आइसा की नेहा बोरा और उनके तीन साथियों की भूख हड़ताल के 21 दिन से अधिक हो गए हैं।दिल्ली के जंतर मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठी जे एन यू की छात्रा और आ ई सा की अध्यक्ष नेहा बोरा जिंदगी और मौत से जूझ रही है।नेहा बोरा का भूख हड़ताल का आज 22 वां दिन है और इन 22 दिनों में नेहा का शरीर जवाब दे , नेहा अब चल फिर नहीं सकती , उन्हें अब वाशरूम जाने के लिये भी व्हील चेयर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है , नेहा का वजन 8 kg से ज़्यादा कम हो गया ,शुगर लेवल काफी कम हो गया , शरीर को रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो गयी , जिसका मतलब शरीर में अब संक्रमण फैलना शुरू हो सकता है , शरीर के कई हिस्सों में लकवा जैसी बीमारी हो सकती है , कोमा में जाने का खतरा बढ़ सकता है,नेहा से उनके साथी रोज पूछ रहे है कि अगर आप अपनी हालत और दर्द सहन नहीं कर पा रही है तो अपना अनशन तोड़ सकती है लेकिन नेहा के हौसले आज भी चट्टान जैसे अटल है , शरीर का त्याग कर देंगे लेकिन हम झुकने वाले नहीं है , 22 दिन की भूख हड़ताल नेहा का हौसला नहीं तोड़ सकती।

नीट परीक्षा में पेपर लीक होने के बाद पुरा देश उबल गया था। जगह जगह लोग परेशान थे और सरकार को कोस रहे थें। जब नीट का पेपर लीक हुआ था तब बिहार सहित कई अन्य राज्यों में भी कई अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक हुए थें। जगह जगह से आवाजें उठी थी।
इसी दौरान 20 छात्रों की आत्महत्या की खबरें भी सामने आईं। परीक्षा व्यवस्था, अनिश्चितता और मानसिक दबाव ने असंख्य युवाओं को तोड़ दिया। हर ऐसी मौत इस व्यवस्था पर एक सवाल है। एक ऐसी व्यवस्था, जिसने छात्रों को सुरक्षा, भरोसा और न्याय देने के बजाय उन्हें निराशा के हवाले कर दिया।
अब उस पेपर लीक और उन बच्चों की मौत की जवाबदेही सरकार की होगी। शिक्षा विभाग का मामला है तो शिक्षा मंत्री इस लीक और इन मौतों का जिम्मेदार होंगे। और उनसे इस्तीफे की मांग की जाएगी।
इस जवाबदेही आंदोलन में जहां धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफे की मांग हो रही है, पेपर लीक पर रोक लगाने के लिए ठोस व्यवस्था की मांग हो रही है, भ्रष्ट हो चुके NTA को खत्म करने और 20 छात्रों की पेपर लीक द्वारा हत्या में न्याय की मांग की जा रही है तो उसके साथ पुरा देश खड़ा है। लेकिन एक तबका है जो इस न्याय की लड़ाई को रोक रहा है। दुष्प्रचार कर रहा है और इस आंदोलन को खत्म करने पर तुला है। वो तबका भाजपा समर्थक है।
आरएसएस के लोग जंतर मंतर पर जा के लगातार आंदोलन में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। वहां गालियाँ दे रहे हैं। वहां लोगों से भीड़ रहे है। कल अजीत दीपके पर एक महिला ने स्याही फेंकी, वो महिला प्रधानमंत्री मोदी को राखी बांधती है। देश के कई हिस्सों मेंआरएस एस और भाजपा का छात्र संगठन एबीपी इस आंदोलन के समर्थकों के साथ मारपीट कर रहा है। सोनम वांगचुक को आरएस एस के लोग अब फ्रॉड कह रहा है। मतलब इनके लिए राम रहीम देशभक्त है, आसाराम देशभक्त है लेकिन सोनम वांगचुक और देश के छात्र देशद्रोही हैं।
अब सवाल यह है कि 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च से माहौल बहुत गर्म है दिल्ली पुलिस की जारी एडवाइजरी के अनुसार, नई दिल्ली जिले में बी एन एस एस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है, हालांकि जंतर-मंतर रोड को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में अपवाद रखा गया है। पुलिस का कहना है कि 20 जुलाई 2026 को संसद तक प्रस्तावित मार्च के लिए न तो अनुमति मांगी गई है और न ही अनुमति प्रदान की गई है।
दिल्ली की उमस और गर्मी आज बेहद कठिन है। ऐसे मौसम में भी जंतर-मंतर पर लोगों का सैलाब उमड़ा हुआ है। भीड़ इतनी है कि लोग एक-दूसरे को हाथ के पंखों से हवा कर राहत देने की कोशिश कर रहे हैं। जब घरों में पंखे और कूलर के बावजूद चैन नहीं है, तब खुले आसमान के नीचे घंटों बैठे लोगों की स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
सोनम वांगचुक को जंतर–मंतर से हटाए जाने के बाद भी आंदोलन थमा नहीं, बल्कि और व्यापक होता दिख रहा है। अब यह सिर्फ एक व्यक्ति का धरना नहीं रह गया है। बड़ी संख्या में लोग आगे आकर इसे अपना आंदोलन बना रहे हैं। आज पूरे दिन जंतर–मंतर पर भारी भीड़ रही। धरना स्थल तक पहुंचने के लिए लोग लंबी कतारों में धैर्य के साथ खड़े रहे और लौटते समय राजीव चौक मेट्रो तक भीड़ का सिलसिला दिखाई दिया। अब सबकी निगाहें सोमवार 20 जुलाई पर हैं—क्या सरकार प्रस्तावित मार्च को होने देगी या उसे रोकने की कोशिश करेगी? या राजधानी दिल्ली एक बड़े राजनीतिक और छात्र आंदोलन की गवाह बनेगी?






