• आरआईएस ( RIS ) के अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में कनेक्टिविटी, आर्थिक सहयोग और विकास साझेदारी को और मजबूत करने के रास्तों पर विमर्श
चौथा अक्षर संवाददाता/ नई दिल्ली
भारत और नेपाल को अपने गहरे और दीर्घकालिक संबंधों की मजबूत नींव पर आगे बढ़ते हुए कनेक्टिविटी, आर्थिक सहयोग और साझा विकास पर केंद्रित अधिक महत्वाकांक्षी साझेदारी की दिशा में काम करना चाहिए। यह बात आज नई दिल्ली में रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज (आरआईएस) द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार — उभरती वैश्विक व्यवस्था में भारत–नेपाल संबंधों की नवीन परिकल्पना में वक्ताओं ने कही। सेमिनार में मुख्य वक्तव्य देते हुए डॉ. स्वर्णिम वागले, वित्त मंत्री, नेपाल सरकार ने कहा कि भारत और नेपाल के पास पहले से मौजूद मजबूत संबंधों के आधार पर अपनी साझेदारी को नए सिरे से आगे बढ़ाने का अवसर है। उन्होंने कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करने तथा दोनों देशों की व्यापक संभावनाओं को साकार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

भारत–नेपाल साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की आवश्यकता पर श्री मुनु महावर, अतिरिक्त सचिव (उत्तर) विदेश मंत्रालय, भारत सरकार ने भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने कनेक्टिविटी और विद्युत जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। साथ ही, उन्होंने उन अधिक महत्वाकांक्षी परियोजनाओं और पहलों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता रेखांकित की, जो दशकों से साकार नहीं हो सकी हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों की संभावनाएं कहीं अधिक व्यापक हैं और इसलिए लक्ष्य निर्धारित करने में अधिक महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। प्रो. राम सिंह, निदेशक, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स ने भारत–नेपाल संबंधों की गहराई और निरंतरता को रेखांकित करते हुए इसे गहरे और स्थायी संबंधों वाला बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को इस सेतु को लगातार मजबूत करते हुए नेपाल की विकास यात्रा में सहयोग देना चाहिए।
क्षेत्रीय स्तर पर भारत–नेपाल संबंधों के व्यापक महत्व को रेखांकित करते हुए राजदूत श्याम सरन, भारत सरकार के पूर्व विदेश सचिव एवं आर आई एस के पूर्व अध्यक्ष, ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच गहरे और परस्पर पूरक संबंध मजबूत क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक मॉडल प्रस्तुत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की व्यापक पूरकताएं गहरे सहयोग के लिए मजबूत आधार प्रदान करती हैं और दक्षिण एशिया में व्यापक क्षेत्रीय सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं। डॉ. शेषाद्रि चारी, सदस्य, आरआईएस के गवर्निंग बोर्ड एवं गवर्निंग काउंसिल, ने भारत और नेपाल द्वारा सहयोग के मूलभूत क्षेत्रों में साथ मिलकर कार्य करने तथा दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के व्यावहारिक उपाय तलाशने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अपने स्वागत वक्तव्य में प्रो. सचिन कुमार शर्मा, महानिदेशक, आरआईएस, ने व्यापार, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत और नेपाल के बीच मजबूत पूरकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों को और गहरा करने तथा आपसी अवरोधों को कम करने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि यह संबंध निकटता से समृद्धि और अंततः साझा समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ सके।
सेमिनार में नीति-निर्माताओं, राजनयिकों, अर्थशास्त्रियों, रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और अन्य विशेषज्ञों ने तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्था के संदर्भ में भारत–नेपाल संबंधों की भावी दिशा पर विचार-विमर्श किया। चर्चा में व्यापार एवं निवेश, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, पर्यटन, डिजिटल एवं वित्तीय संपर्क तथा सीमा-पार उत्पादन और मूल्य श्रृंखलाओं में अधिक एकीकरण सहित द्विपक्षीय आर्थिक एवं विकास सहयोग को मजबूत करने के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया। विमर्श के दौरान वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक परिवेश में हो रहे व्यापक बदलावों पर भी चर्चा हुई। इनमें भू-आर्थिक विखंडन, बदलती व्यापार एवं औद्योगिक नीतियां, तकनीकी परिवर्तन, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा तथा विकासशील देशों के समक्ष उभरती चुनौतियां शामिल हैं। सेमिनार ने इस बात पर विचार के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया कि भारत और नेपाल अपने दीर्घकालिक संबंधों को मजबूत करते हुए उभरते अवसरों और चुनौतियों का सामना किस प्रकार कर सकते हैं तथा सहयोग, कनेक्टिविटी और साझा विकास के परिणामों को कैसे और अधिक सुदृढ़ किया जा सकता है।






