श्याम लाल शर्मा /चौथा अक्षर
आइसा की अखिल भारतीय अध्यक्ष कॉमरेड नेहा पर झारखण्ड के रांची में संघी ताकतों द्वारा स्याही फेंकने के ख़िलाफ़ सब तरफ घोर निंदा की जा रही है जो लोग कल तक सोशल मीडिया पर बैठकर पूछ रहे थे कि “नेहा कहाँ है? वो सामने क्यों नहीं आती?”, कल जब नेहा बोरा झारखंड के रांची में छात्रों के हक के लिए, पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ सड़कों पर उतरीं, तो इन कायरों से उनकी हिम्मत बर्दाश्त नहीं हुई। हद तो तब हो गई जब एक महिला नेता पर कायरों की तरह स्याही फेंकने के बाद वो शख्स ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने लगा यह कैसा धार्मिक उन्माद है? भगवान राम का नाम मर्यादा, न्याय और सम्मान का प्रतीक है, लेकिन कुछ लोगों ने अपनी घटिया और हिंसक हरकतों को छिपाने के लिए धर्म को एक ढाल बना लिया है। एक निहत्थी लड़की पर छिपकर हमला करना और फिर पवित्र नारे लगाना धर्म नहीं, बल्कि धर्म का घोर अपमान है। अगर आपमें हिम्मत थी, तो उनकी बातों का जवाब तर्कों से देते, मुद्दों पर बात करते लेकिन जब आपके पास कोई दलील नहीं बचती, तब आप इस तरह की ओछी हरकतों पर उतर आते हैं नेहा बोरा पर यह हमला सिर्फ उनपर नहीं, बल्कि उन हज़ारों छात्रों की आवाज़ पर हमला है जो अपने हक के लिए लड़ रहे हैं लेकिन यह याद रखिए, इस तरह की स्याही फेंककर आप किसी की आवाज़ को दबा नहीं सकते।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर हमला करने वाला शख्स कौन है और उसने ऐसा क्यों किया? जब वह लड़का पकड़ा गया और उससे पूछा गया कि उसने ये क्यों किया? बोला- नेहा पसंद नहीं. उमर खालिद को सपोर्ट करती है. देशद्रोही है.इस 26 साल के अमरनाथ पांडे नाम के लड़के को नेहा और उमर खालिद के बारे में बस इतना ही पता था कि वो देशद्रोही हैं. लेकिन उमर खालिद और नेहा को देशद्रोही किसने ठहराया? उमर खालिद पर कौन सा आरोप साबित हुआ? इतने समय से जेल में बंद उमर खालिद के केस का ट्रायल तक शुरू नहीं हुआ. जिस नेहा पर उसने स्याही फेंकी, वो नेहा जंतर मंतर पर ऐतिहासिक तौर पर 20 दिन से ज्यादा भूखी रहीं.और अपने विचारों, हिम्मत से एक बड़ी लकीर खींच दी.


आरोपी ने खुद स्याही फेंकने की बात स्वीकार करते हुए नेहा बोरा को ‘एंटी-नेशनल’ बताया। वहीं, नेहा बोरा ने इस घटना के लिए भाजपा और आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाए। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर छात्र पिछले 14 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। छह छात्र भूख हड़ताल पर हैं। इसी दौरान AISA अध्यक्ष नेहा बोरा छात्रों का समर्थन करने पहुंचीं। तभी एक युवक ने उन पर काली स्याही फेंक दी। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत आरोपी को पकड़ लिया और हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। हिरासत में लिए गए युवक ने मीडिया के सामने दावा किया कि उसने जानबूझकर नेहा बोरा पर स्याही फेंकी। उसका आरोप था कि नेहा बोरा ‘एंटी-नेशनल’ हैं और वह उनके विरोध में यह कदम उठा रहा है। हालांकि उसने अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और घटना के पीछे की पूरी वजह जानने की कोशिश में जुटी है।
नेहा बोरा ने भाजपा-आरएसएस पर लगाए गंभीर आरोप घटना के बाद नेहा बोरा ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद को छात्रों का हितैषी बताते हैं, वही छात्र आंदोलन को कमजोर करने के लिए इस तरह की हरकतें करा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के मुद्दों से ध्यान भटकाने और डर का माहौल बनाने के लिए इस तरह के हमलों का सहारा लिया जा रहा है। नेहा ने खुद साफ़ कह दिया है कि वे इस स्याही को गर्व के साथ पहनती हैं और इसी स्याही से छात्र अपना भविष्य लिखेंगे इस घटिया हरकत की जितने कड़े शब्दों में निंदा की जाए, वो कम है। लोकतंत्र में ऐसी कायरता के लिए कोई जगह नहीं है!नेहा बोरा ने कहा कि स्याही फेंकने जैसी घटनाओं से छात्र आंदोलन दबने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को लगता है कि इस तरह छात्रों और युवाओं के गुस्से को खत्म किया जा सकता है, तो यह उसकी गलतफहमी है। उन्होंने सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यह आंदोलन भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ है और इसे हर हाल में आगे बढ़ाया जाएगा।
झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी और सी जी एल जैसी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र लंबे समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षाओं को रद्द कर निष्पक्ष तरीके से दोबारा कराने की मांग कर रहे हैं। आंदोलन अब राज्यव्यापी स्वरूप ले चुका है। दो छात्र संगठनों ने विधानसभा मार्च का भी ऐलान किया है। मानसून सत्र के बीच यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है और सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
आइसा अध्यक्ष कामरेड नेहा पर स्याही फेंके जाने के ख़िलाफ़ इलाहाबाद में हुआ विरोध प्रदर्शन
आइसा की अखिल भारतीय अध्यक्ष कॉमरेड नेहा पर झारखण्ड के रांची में संघी ताकतों द्वारा स्याही फेंकने के ख़िलाफ़ इलाहाबाद में बक्शी बांध पर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन(आइसा) द्वारा विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रतिवाद सभा आयोजित की गई और बक्शी बांध पर मार्च निकाला गया।
प्रतिवाद सभा को संबोधित करते हुए आइसा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष कॉमरेड मनीष ने कहा कि एक दौर में जब सावित्री बाई फुले, फातिमा शेख जैसे लोग शिक्षा पाने की लड़ाई लड़ रहीं थीं तो उन पर सामंती ताकतों द्वारा कीचड़, पत्थर फेंककर हमला किया जाता था। आज जब आइसा की केंद्रीय अध्यक्ष कॉमरेड नेहा शिक्षा और रोजगार को बचाने की लड़ाई को पूरे देश भर में लड़ रही हैं तब उन पर उन्हीं सामंती, मनुवादी ताकतों द्वारा स्याही फेंककर हमला किया जाता है। इस घटना की हम निंदा करते हैं। मनीष ने कहा ऐसे हमलों से लोकतांत्रिक संघर्ष और अधिक मज़बूत होगा। हम कॉमरेड नेहा के साथ पूरी एकजुटता से खड़े हैं।
आइसा इलाहाबाद विश्वविद्यालय की अध्यक्ष कॉमरेड सोनाली ने प्रतिवाद सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पूरे देश भर में जब शिक्षा, रोजगार और संविधान बचाने के लिए आंदोलन तेज़ हो रहे हैं तब BJP और RSS के गुंडों की बौखलाहट भी बढ़ती जा रही है। BJP और RSS के गुंडे विश्वविद्यालय परिसर से लेकर सड़क पर आंदोलन कर रहे छात्रों पर हमले कर रहे हैं। पेपर लीक के ख़िलाफ़ चल रहे आन्दोलन को समर्थन देने जब आइसा की केंद्रीय अध्यक्ष कॉम नेहा झारखण्ड के रांची में विधानसभा मार्च में पहुंचीं तब इन्हीं सामंती ताकतों द्वारा स्याही फेंकी जाती है। इन ताकतों के ख़िलाफ़ हमारी लड़ाई जारी रहेगी।
इलाहाबाद के प्रतियोगी छात्र अखिलेश ने कहा कि भाजपाई ताकतों द्वारा कॉमरेड नेहा पर स्याही फेंकना लोकतांत्रिक आवाज़ों को डराने और असहमति को दबाने का कायर प्रयास है। हम इस घटना की कड़ी निंदा करते हैं और संघी गुण्डे पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं।
प्रतिवाद सभा का संचालन करते हुए आइसा उत्तर प्रदेश के सचिव कॉम शशांक ने कहा कि सावित्री बाई फुले, फातिमा शेख की विरासत को बचाने के लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी। शशांक ने कहा कि फासीवादी, सामंती द्वारा संविधान पर किए जा रहे हमलों के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रहेगी। प्रतिवाद सभा में साक्षी, पल्लवी, सीमा, अमित, आशीष, शशिभूषण, सुजीत, सुनील, राधा समेत तमाम आइसा एक्टिविस्ट और सैकड़ों छात्र युवा मौजूद रहे।






