भारत अपने स्वच्छ ऊर्जा अभियान को एक और कदम आगे बढ़ाने की तैयारी में है। पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के बाद अब कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस यानी CNG में कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) की ब्लेंडिंग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की योजना चालू वित्त वर्ष में CNG के साथ करीब 3 प्रतिशत कम्प्रेस्ड बायोगैस मिलाने की दिशा में आगे बढ़ने की है। इसका उद्देश्य न केवल प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम करना है, बल्कि देश में पैदा होने वाले जैविक कचरे का बेहतर इस्तेमाल भी करना है।
कम्प्रेस्ड बायोगैस को एक रिन्यूएबल फ्यूल माना जाता है। इसे कृषि अवशेष, पशुओं के गोबर, खाद्य कचरे और दूसरे जैविक पदार्थों से तैयार किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में ऑर्गेनिक वेस्ट से बायोगैस बनाई जाती है, जिसके बाद उसे शुद्ध करके कम्प्रेस्ड बायोगैस का रूप दिया जाता है। इसके गुण प्राकृतिक गैस के काफी करीब होते हैं, इसलिए इसे CNG के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। CBG ब्लेंडिंग बढ़ने से भारत को कई स्तरों पर फायदा मिलने की उम्मीद है। देश में हर साल बड़ी मात्रा में कृषि और जैविक कचरा पैदा होता है। यदि इस कचरे को खुले में जलाने या फेंकने के बजाय ईंधन बनाने में इस्तेमाल किया जाए तो प्रदूषण कम करने के साथ-साथ ऊर्जा का नया स्रोत तैयार किया जा सकता है। CNG में CBG मिलाने से प्राकृतिक गैस की खपत में भी कमी आ सकती है। भारत अपनी जरूरत की प्राकृतिक गैस का एक हिस्सा आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर तैयार होने वाली बायोगैस का इस्तेमाल बढ़ने से आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल सकता है फायदा ?
CBG उत्पादन का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण क्षेत्रों को भी मिल सकता है। कृषि अवशेष और पशु अपशिष्ट जैसी सामग्री बायोगैस प्लांट के लिए कच्चा माल बन सकती है। इससे किसानों और स्थानीय स्तर पर जैविक कचरा उपलब्ध कराने वालों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके अलावा CBG प्लांट के आसपास परिवहन, रखरखाव और अन्य सेवाओं से रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं।
बायोगैस तैयार होने के बाद बचने वाले ठोस पदार्थ का इस्तेमाल जैविक खाद के रूप में किया जा सकता है। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है। इस तरह CBG सिर्फ ईंधन का विकल्प नहीं है, बल्कि कचरा प्रबंधन और कृषि क्षेत्र से जुड़ी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला माध्यम भी बन सकता है। आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि CNG में CBG मिलाने से वाहनों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। CBG को शुद्ध और आवश्यक मानकों के अनुरूप तैयार करने के बाद CNG के साथ ब्लेंड किया जाता है। इसलिए निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार मिश्रण होने पर सामान्य CNG वाहनों के इस्तेमाल में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए।
सरकार के इस कदम को पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग की नीति के बाद स्वच्छ ईंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा सकता है। आने वाले समय में CBG उत्पादन और वितरण का नेटवर्क मजबूत होता है तो इसकी ब्लेंडिंग का स्तर भी बढ़ाया जा सकता है। भारत का लक्ष्य अब केवल पेट्रोल और डीजल जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भर रहना नहीं है। इलेक्ट्रिक वाहन, इथेनॉल, बायोडीजल, ग्रीन हाइड्रोजन और CBG जैसे विकल्प ऊर्जा व्यवस्था को अधिक विविध बनाने में भूमिका निभा सकते हैं। CNG में 3 प्रतिशत CBG ब्लेंडिंग की दिशा में बढ़ता कदम इसी बदलाव का हिस्सा है, जिससे कचरे को उपयोगी ऊर्जा में बदलने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की उम्मीद है।






