नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत और रूस के बीच तेल कारोबार को लेकर एक दिलचस्प स्थिति सामने आई है। रूस, जो दुनिया के बड़े तेल उत्पादकों में शामिल है, ने अगस्त 2026 में भारत से बड़ी मात्रा में पेट्रोल आयात किया। खास बात यह है कि इस पेट्रोल का बड़ा हिस्सा रूसी कच्चे तेल को भारत में रिफाइन करके तैयार किया गया था। Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) की अगस्त की मासिक रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने अगस्त में कुल 1.72 लाख टन तेल उत्पाद आयात किए, जिसमें भारत की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत रही।
भारत ने रूस को 1.20 लाख टन पेट्रोल भेजा ?
CREA के अनुसार, अगस्त में भारत ने रूस को करीब 1.20 लाख टन पेट्रोल निर्यात किया, जिसकी अनुमानित कीमत 7.8 करोड़ यूरो थी। यह रूस के कुल पेट्रोल आयात का लगभग 94 प्रतिशत हिस्सा था। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत से भेजा गया पूरा पेट्रोल गुजरात स्थित वडीनार रिफाइनरी से लोड किया गया था। इस कारोबार की खास बात यह है कि वडीनार रिफाइनरी ने 2026 के पहले आठ महीनों में अपना कच्चा तेल पूरी तरह रूस से प्राप्त किया था। यानी रूस से आया कच्चा तेल भारत में रिफाइन होकर पेट्रोल बना और फिर उसी ईंधन का एक हिस्सा वापस रूस भेजा गया।
रूस में ईंधन की कमी बनी वजह ?
CREA की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की कई रिफाइनरियों पर यूक्रेन के ड्रोन हमलों से घरेलू रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हुई। इसके चलते रूस में पेट्रोल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा और उसे विदेशों से तैयार ईंधन खरीदना पड़ा। अगस्त में रूस का तेल उत्पाद आयात बढ़कर 1.72 लाख टन हो गया, जो पिछले मासिक रिकॉर्ड से सात गुना से अधिक था। रूस के कुल तेल उत्पाद आयात में अगस्त के दौरान पेट्रोल की हिस्सेदारी करीब 74 प्रतिशत रही। इसके मुकाबले 2023 से 2025 के बीच यह औसतन केवल 6 प्रतिशत थी। यह बदलाव रूस में उस समय पैदा हुई ईंधन आपूर्ति की समस्या को दर्शाता है।
रूसी कंपनी की हिस्सेदारी वाली रिफाइनरी से हुआ निर्यात ?
इस पूरे मामले में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है। वडीनार रिफाइनरी का संचालन Nayara Energy करती है, जिसमें रूसी तेल कंपनी Rosneft की 49.13 प्रतिशत हिस्सेदारी है। CREA के मुताबिक, अगस्त में भारत से रूस भेजा गया पेट्रोल Nayara Energy द्वारा बेचा गया और Rosneft ने इसे खरीदा। इस तरह कारोबार की एक असामान्य स्थिति बन गई—रूस का कच्चा तेल भारत आया, उसे भारत में रिफाइन कर पेट्रोल तैयार किया गया और फिर तैयार पेट्रोल को रूस भेज दिया गया।
भारत बना रूस के लिए प्रमुख ईंधन आपूर्तिकर्ता ?
अगस्त में भारत रूस के तेल उत्पाद आयात का सबसे बड़ा स्रोत रहा। CREA के अनुसार, रूस ने दक्षिण कोरिया से भी करीब 18 हजार टन तेल उत्पाद खरीदे, जिनमें मुख्य रूप से गैसऑयल शामिल था। वहीं मिस्र से करीब 25 हजार टन डीजल आयात किया गया। यह घटनाक्रम वैश्विक तेल कारोबार में बदलती परिस्थितियों को भी दिखाता है। एक तरफ भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में शामिल है, वहीं दूसरी तरफ उसकी रिफाइनिंग क्षमता के कारण वह तैयार पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है। अगस्त 2026 में भारत द्वारा रूस को 1.20 लाख टन पेट्रोल भेजना वैश्विक ऊर्जा व्यापार का एक अनोखा उदाहरण है। रूस के कच्चे तेल से भारत में तैयार हुआ ईंधन वापस रूस पहुंचा और घरेलू रिफाइनरी संकट के बीच वहां की जरूरत को पूरा करने में मददगार बना।






