नई दिल्ली: भारत में एथेनॉल मिश्रण और उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रगति देखने को मिल रही है। एथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) 2025-26 के दौरान अगस्त 2026 के अंत तक देश में कुल 895 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हो चुकी है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, यह मात्रा निर्धारित किए गए कुल 1,048 करोड़ लीटर के अनुबंध का लगभग 85 प्रतिशत है।
एथेनॉल आपूर्ति में अनाज आधारित स्रोतों का दबदबा ?
आंकड़ों की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत की कुल एथेनॉल आपूर्ति में अनाज आधारित फीडस्टॉक की हिस्सेदारी लगातार मजबूत बनी हुई है। अगस्त के अंत तक उपलब्ध 895 करोड़ लीटर एथेनॉल में से 624 करोड़ लीटर अनाज आधारित स्रोतों से प्राप्त हुआ। वहीं, 271 करोड़ लीटर एथेनॉल चीनी आधारित फीडस्टॉक से आया। इस तरह कुल आपूर्ति में अनाज आधारित एथेनॉल की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत रही। दूसरी ओर चीनी आधारित स्रोतों का योगदान करीब 30 प्रतिशत रहा। यह बदलाव भारत के एथेनॉल उद्योग में फीडस्टॉक के बदलते स्वरूप को भी दर्शाता है।
तय लक्ष्य का 85 प्रतिशत हुआ पूरा ?
ESY 2025-26 के लिए तेल विपणन कंपनियों और एथेनॉल आपूर्तिकर्ताओं के बीच कुल 1,048 करोड़ लीटर की आपूर्ति का अनुबंध तय किया गया था। अगस्त के अंत तक 895 करोड़ लीटर की आपूर्ति पूरी होने का मतलब है कि निर्धारित अनुबंध का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है। एथेनॉल की यह आपूर्ति पेट्रोल में मिश्रण की नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। भारत सरकार लंबे समय से पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों के लिए कृषि उत्पादों की मांग बढ़ाना और घरेलू स्तर पर वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है।
चीनी उद्योग के साथ अनाज क्षेत्र के लिए भी बढ़ा अवसर ?
एथेनॉल उत्पादन के लिए अनाज आधारित फीडस्टॉक के बढ़ते इस्तेमाल से देश के अनाज प्रसंस्करण और डिस्टिलरी उद्योग को भी नया बाजार मिल रहा है। दूसरी तरफ चीनी उद्योग से जुड़े डिस्टिलरी संयंत्र भी एथेनॉल उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, फीडस्टॉक के अलग-अलग स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ने से एथेनॉल उत्पादन को अधिक व्यापक आधार मिल सकता है। इससे किसी एक कृषि उत्पाद पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, एथेनॉल उत्पादन के लिए अनाज और चीनी की उपलब्धता, कीमत तथा घरेलू मांग के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी होगा।
आगे भी बढ़ सकती है एथेनॉल की मांग ?
अगस्त 2026 तक 895 करोड़ लीटर की आपूर्ति पूरी होना बताता है कि एथेनॉल क्षेत्र देश के ऊर्जा और कृषि क्षेत्र में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका हासिल कर रहा है। कुल अनुबंध का अभी भी करीब 15 प्रतिशत हिस्सा बाकी है। इसलिए ESY 2025-26 की समाप्ति तक आपूर्ति में और बढ़ोतरी होने की संभावना बनी हुई है। भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ाने की नीति के साथ आने वाले वर्षों में एथेनॉल की मांग और उत्पादन क्षमता दोनों बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में अनाज और चीनी आधारित दोनों स्रोत उद्योग की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अगस्त तक के आंकड़े यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि देश का एथेनॉल सेक्टर अब केवल चीनी उद्योग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अनाज आधारित उत्पादन भी इसका प्रमुख आधार बन चुका है।






