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कांवड़ यात्रा ने पकड़ी रफ्तार, जीटी रोड पर धार्मिक सामग्री का कारोबार चरम पर

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आशीष कर/चौथा अक्षर / गाजियाबाद

वार्षिक कांवड़ यात्रा के चरम पर पहुंचते ही गाजियाबाद की ऐतिहासिक ग्रैंड ट्रंक (जीटी) रोड पर केसरिया झंडे, त्रिशूल, धार्मिक बैनर और अन्य पूजा-सामग्री की बिक्री जोरों पर है। यात्रा मार्ग के किनारे हजारों अस्थायी दुकानें सज गई हैं, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
भगवान शिव के भक्त, जिन्हें कांवड़िया कहा जाता है, हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर पैदल अपने-अपने गांवों और शहरों की ओर लौट रहे हैं। ये श्रद्धालु दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब तथा देश के विभिन्न राज्यों से आए हैं। वे महाशिवरात्रि के अवसर पर अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में गंगाजल अर्पित करेंगे।

हर वर्ष आयोजित होने वाली यह यात्रा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजमार्गों को केसरिया रंग में रंग देती है। भगवान शिव के जयकारों और भजनों के बीच श्रद्धालु सुसज्जित कांवड़ लेकर आगे बढ़ते हैं। यात्रा मार्ग पर लगे अस्थायी बाजारों में धार्मिक झंडे, पूजा सामग्री, माथे पर बांधने वाले पट्टे, घंटियां, त्रिशूल और अन्य धार्मिक वस्तुओं की खूब बिक्री हो रही है।

कांवड़ियों की सुगम और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा सरकारों, स्थानीय प्रशासन तथा अनेक सामाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों ने मार्ग में सैकड़ों शिविर लगाए हैं। इन शिविरों में श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क भोजन, पेयजल, चिकित्सा सुविधा, विश्राम स्थल और आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, व्यापक सुरक्षा व्यवस्था, यातायात डायवर्जन और चौबीसों घंटे निगरानी की व्यवस्था भी की गई है, ताकि श्रद्धालुओं और आम यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

अपने गंतव्य की दूरी के अनुसार अनेक कांवड़ियों को यह आध्यात्मिक यात्रा पूरी करने में 10 से 15 दिन का समय लगता है। अंततः वे भगवान शिव को पवित्र गंगाजल अर्पित कर उत्तर भारत की सबसे बड़ी वार्षिक धार्मिक यात्राओं में से एक का समापन करते हैं।

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